
हल्द्वानी। जमीयत उलमा-ए-हिन्द, जो एक पुरानी और देशव्यापी धार्मिक व सामाजिक तंजीम है, हमेशा से क़ौमी, समाजी और फ़लाही मैदान में अपनी ख़िदमात अंजाम देती आ रही है। तालीम के फ़रोग़, समाज सुधार, अमन व भाईचारे की स्थापना और ज़रूरतमंदों की मदद जैसे अहम मैदानों में जमीयत का किरदार हमेशा से नुमायाँ रहा है। आज भी यह सिलसिला लगातार जारी है, जहां जमीयत की जानिब से तालीमी वज़ीफ़े, ग़रीब, यतीम और ज़रूरतमंद छात्र-छात्राओं की कफ़ालत की जा रही है और हर मौक़े पर क़ौम की रहनुमाई की जा रही है। यही वजह है कि जमीयत को आवाम में भरपूर एतमाद और मक़बूलियत हासिल है।

जमीयत उलमा तालीमी मैदान में ख़ास तौर पर लगातार सरगर्म है। आज जमीयत उलमा (अरशद मदनी) की तरफ से हज़रत मौलाना मुफ्ती अब्दुल क़दीर साहब के हाथों जमीयत के हेड ऑफिस मदरसा अरबिया एहया उल उलूम, लाइन नंबर एक, हल्द्वानी में तीन बच्चियों को, जो उच्च शिक्षा हासिल कर रही हैं, एक साल की पूरी फ़ीस बतौर मदद अदा की गई। इसमें दो बच्चियों को 39,400-39,400 रुपये और एक बच्ची को 20,000 रुपये दिये गए। यह महज़ एक मौसमी मदद नहीं, बल्कि समाज की बेटियों के ख़्वाबों को हक़ीक़त में बदलने की एक अमली और जद्दोजेहद से भरी कोशिश है।
इस मौके पर हज़रत मौलाना मोहम्मद मुकीम साहब, सदर जमीयत जिला नैनीताल, हज़रत मौलाना मोहम्मद आसिम साहब, सदर शहर हल्द्वानी, मौलाना मोहम्मद कासिम साहब, सेक्रेटरी जिला नैनीताल, मुफ्ती मोहम्मद लुकमान साहब, सेक्रेटरी हल्द्वानी, मुफ्ती निजामुद्दीन, मौलाना फुरकान, मुफ्ती यूनुस, कारी जलीस, मौलाना यासीन, जुबेर खान, हाफिज मोहम्मद कासिम, अब्दुल हसीब, डॉ. अदनान और दीगर अहल-ए-क़ौम मौजूद रहे।


