वनाग्नि और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकथाम को लेकर हल्द्वानी में मीडिया संग मंथन, वन विभाग ने मांगा सकारात्मक सहयोग

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हल्द्वानी। हल्द्वानी वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि और मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम को लेकर शुक्रवार को तिकोनिया वन परिसर स्थित पूर्णागिरी सभागार में मीडिया प्रतिनिधियों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य इन संवेदनशील विषयों पर सकारात्मक सूचना प्रसार, बेहतर समन्वय और जनसहभागिता को बढ़ावा देना रहा।

प्रभागीय वनाधिकारी के निर्देशन में आयोजित कार्यशाला में क्षेत्र के प्रमुख प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान उप प्रभागीय वनाधिकारी नंधौर, वन क्षेत्राधिकारी छकाता, सीनियर बायोलॉजिस्ट प्रशांत कुमार, इंदर रौतेला, जेआरएफ समेत अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

कार्यशाला की शुरुआत प्रतिभागियों के परिचय के साथ हुई। वन्यजीव प्रेमी एवं प्रकृतिविद राजेश भट्ट ने मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े विभिन्न पहलुओं और प्रचलित मिथकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस विषय में मीडिया की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि तथ्यपरक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के माध्यम से न केवल गलतफहमियां दूर की जा सकती हैं, बल्कि जनजागरूकता बढ़ाकर संघर्ष की घटनाओं में कमी भी लाई जा सकती है।

उप प्रभागीय वनाधिकारी नंधौर ने पिछले पांच वर्षों में हल्द्वानी वन प्रभाग के अंतर्गत हुई मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं का विवरण प्रस्तुत किया। साथ ही वनाग्नि रोकथाम और संघर्ष न्यूनीकरण के लिए विभाग द्वारा किए गए प्रयासों, नवाचारों और उपयोग में लाए जा रहे उपकरणों की जानकारी दी। वनाग्नि सीजन में चल रहे जनजागरूकता अभियानों और रोकथाम कार्यक्रमों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

प्रभागीय वनाधिकारी ने कहा कि वनों और वन्यजीवों के प्रति समाज में व्याप्त नकारात्मक सोच को मीडिया की भागीदारी से सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। उन्होंने मीडिया से तथ्य आधारित सूचनाओं के प्रसार और वन विभाग के प्रयासों को जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग की अपील की।

कार्यशाला में मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों, विशेषकर जंगलों से चारा और जलौनी संग्रहण की समस्या पर भी चर्चा हुई। इसके समाधान के तौर पर सामूहिक गौशाला और चारा बैंक जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने के सुझाव दिए गए।

वक्ताओं ने वनाग्नि और मानव-वन्यजीव संघर्ष को केवल वन विभाग की नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए समाज, मीडिया और प्रशासन के साझा प्रयासों पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में मीडिया प्रतिनिधियों से सकारात्मक सहयोग की अपील करते हुए सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।


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