

देहरादून। NEET UG 2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर MBBS में दाखिला दिलाने के मामले में देहरादून पुलिस की एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान रूपेश पंडित निवासी पूर्णिया, बिहार, हाल निवासी मेरठ और अरविंद कुमार निवासी लक्सर, हरिद्वार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार कराकर अभ्यर्थियों को MBBS में दाखिला दिलाने की साजिश रची थी।
पुलिस के मुताबिक, 13 सितंबर 2026 को थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने और जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के संबंध में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया।
एसआईटी ने जांच के दौरान प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों को कब्जे में लेकर उनका गहन परीक्षण किया। जांच में अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। इसके बाद टीम ने संबंधित शिक्षण संस्थानों में जाकर रिकॉर्ड जुटाए, जिससे अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी सामने आई।
विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को पूछताछ के लिए थाना रायपुर लाया। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, रूपेश पंडित पिछले करीब पांच वर्षों से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था और मेरठ में MECODO पाठशाला नाम से कंपनी संचालित करता था। वह विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में MBBS, BTech, BCA, BBA और BCom सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिला दिलाने का काम करता था।
पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली कि अरविंद कुमार रूपेश का पुराना परिचित था और करीब दो-तीन वर्षों से उसके संपर्क में था। अरविंद ने अपनी बेटी परी के MBBS में दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था। इसके साथ ही उसने अपने दो परिचितों के बच्चों के MBBS दाखिले की बात भी की थी। पुलिस के मुताबिक, रूपेश और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से MBBS में दाखिला दिलाने की बात कही और प्रत्येक दाखिले के लिए 45 लाख रुपये लेने की डील तय की।
पुलिस के अनुसार, तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से एडवांस के तौर पर 20-20 लाख रुपये लिए गए थे। बाकी रकम MBBS में दाखिला होने और कक्षाएं शुरू होने के बाद देने की बात तय हुई थी। आरोप है कि रूपेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेज तैयार करवाए और उन्हीं के आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाए गए। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में MBBS में दाखिला कराया गया।
एसआईटी अब मामले से जुड़े अन्य आरोपियों और पूरे नेटवर्क की भूमिका की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण से जुड़े सभी पहलुओं की विवेचना की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
