
हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से पीएच.डी. शोधार्थियों की छमाही प्रगति समीक्षा के लिए आयोजित दो दिवसीय शोध कार्यशाला का मंगलवार को शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के सीडीएस जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित कार्यशाला में शोध संस्कृति, सामाजिक विज्ञान अनुसंधान और शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन और विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुई। निदेशक शोध प्रोफेसर गिरिजा प्रसाद पांडे ने शोधार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया में रिसर्च और डेवलपमेंट को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। उन्होंने शोधार्थियों से अपील की कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल केवल कॉपी-पेस्ट तक सीमित न रखें, बल्कि शोध की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने के लिए करें। उन्होंने कहा कि शोध में लगाए गए चार-पांच वर्षों का लाभ केवल शोधार्थी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका फायदा राज्य, देश और वैश्विक समुदाय को भी मिलना चाहिए।
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी के पूर्व कुलपति एवं चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर संजीव शर्मा ने “Emerging Dimensions of Social Science Research” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि शोधार्थी अपने जीवन के कई वर्ष शोध को देते हैं, इसलिए उन्हें शोध के महत्व के साथ अपनी जिम्मेदारी को भी समझना चाहिए।
उद्यमी, अभिनेता और समाजसेवी द्वारिका प्रसाद रतूड़ी ने “Cross-Cultural Entrepreneurship and Global Strategy” विषय पर शोधार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए प्रोफेशनलिज्म, समय की पाबंदी, तैयारी, अनुशासन और टीम के प्रति सम्मान बेहद महत्वपूर्ण हैं।
कार्यशाला के अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य का बेहतर उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास है कि शिक्षार्थियों से पढ़ाई पूरी होने के बाद भी निरंतर जुड़ाव बना रहे। उन्होंने शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को गुणवत्ता बढ़ाने के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाने पर जोर दिया।
कार्यशाला के दूसरे चरण में विश्वविद्यालय के विभिन्न विषयों के पीएच.डी. शोधार्थियों ने अपनी छमाही प्रगति प्रस्तुत की। शोधार्थियों ने विशेषज्ञों और समीक्षा समिति के समक्ष अपने शोध कार्य की प्रगति रखी और पूछे गए सवालों के जवाब दिए। दो दिवसीय शोध कार्यशाला का समापन 19 अगस्त को होगा।
