हल्द्वानी: उत्तराखंड कांग्रेस में फिर बढ़ी अंदरूनी खींचतान, हरीश रावत की यात्रा पर हाईकमान सख्त

हल्द्वानी। उत्तराखंड कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से निकाली जा रही ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर कांग्रेस हाईकमान ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश प्रभारी कुमारी शेलजा की नाराजगी के बाद अब पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी हरीश रावत समेत पार्टी नेताओं को व्यक्तिगत स्तर पर अभियान चलाने को लेकर स्पष्ट नसीहत दी है।

केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि कांग्रेस किसी भी नेता के व्यक्तिगत अभियान को स्वीकार नहीं करेगी। उत्तराखंड में सभी नेता मिलकर कांग्रेस के बैनर तले ही अभियान चलाएंगे। उन्होंने साफ किया कि पार्टी का एकमात्र उद्देश्य कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी की जीत सुनिश्चित करना होना चाहिए।

वेणुगोपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी में किसी भी नेता का व्यक्तिगत प्रचार या अलग-अलग अभियान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी नेताओं को संगठन की ओर से तय सामूहिक कार्यक्रमों के तहत ही काम करना होगा। संदेश को सीधे तौर पर गुटबाजी और समानांतर राजनीतिक गतिविधियों पर लगाम लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

इससे पहले उत्तराखंड कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शेलजा ने हरीश रावत को पत्र लिखकर उनकी यात्रा पर आपत्ति जताई थी। एक अक्टूबर को जारी पत्र में शेलजा ने कहा था कि यात्रा की जानकारी न तो प्रदेश प्रभारी को दी गई और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से इस संबंध में चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन और प्रदेश नेतृत्व की सहमति के बिना समानांतर कार्यक्रम आयोजित करना आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी हित में नहीं है।

शेलजा ने अपने पत्र में पार्टी नेताओं के कुछ बयानों का भी जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव से पहले कांग्रेस को एकजुट मोर्चा पेश करने की जरूरत है। ऐसे समय में अलग-अलग कार्यक्रम और सार्वजनिक बयानबाजी पार्टी की एकजुटता के संदेश को प्रभावित कर सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, विवाद के बीच केसी वेणुगोपाल ने हरीश रावत को दिल्ली बुलाकर पार्टी संगठन के साथ मिलकर काम करने की सलाह दी। रावत ने रविवार को वेणुगोपाल से मुलाकात भी की। हालांकि, इसके बाद भी रावत की यात्रा जारी है।

हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर यात्रा को लेकर लिखा कि चुनौती बड़ी है, लेकिन उत्तराखंड की शान और स्वाभिमान की रक्षा का संकल्प भी उतना ही मजबूत है। उन्होंने लोगों से जुड़ने और देवभूमि के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने की बात कही। रावत के इस रुख से साफ संकेत मिल रहे हैं कि हाईकमान की नाराजगी के बावजूद वह अपनी राजनीतिक सक्रियता कम करने के मूड में नहीं हैं।

उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में कांग्रेस हाईकमान का पूरा जोर प्रदेश संगठन में एकजुटता बनाए रखने पर है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि चुनाव से पहले वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आएं।

वहीं, हरीश रावत की लगातार राजनीतिक सक्रियता को लेकर पार्टी के भीतर कई तरह की चर्चाएं भी तेज हैं। रावत के हालिया चुनावी प्रदर्शन को लेकर विपक्ष और पार्टी के भीतर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन उत्तराखंड की राजनीति में उनका प्रभाव और सक्रियता अब भी बनी हुई है। उनकी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ और हाईकमान की सख्त प्रतिक्रिया ने प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

हल्द्वानी: उत्तराखंड कांग्रेस में फिर बढ़ी अंदरूनी खींचतान, हरीश रावत की यात्रा पर हाईकमान सख्त