हल्द्वानी: जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने ग्रीष्म ऋतु के दौरान बढ़ते तापमान और संभावित जल संकट को देखते हुए जनपद में पेयजल संरक्षण के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। यह आदेश 25 मई 2026 से 20 जून 2026 अथवा मानसून प्रारम्भ होने तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगा। आदेश का उद्देश्य जनसामान्य को निर्बाध एवं समुचित पेयजल उपलब्ध कराना तथा भीषण गर्मी और लू की स्थिति में जल संकट से प्रभावी ढंग से निपटना है।
जारी आदेशों के तहत जनपद में सभी नए पेयजल संयोजनों की स्वीकृति और निर्गमन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। साथ ही भवन निर्माण कार्यों के लिए पूर्व में स्वीकृत अस्थायी एवं निर्माणाधीन जल संयोजन भी निरस्त कर दिए गए हैं। वाहन सर्विस सेंटरों और धुलाई केंद्रों पर पानी से वाहन धोने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है तथा केवल ड्राई वॉश प्रणाली की अनुमति दी गई है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दण्डात्मक कार्रवाई करते हुए जल संयोजन विच्छेद किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने किसी भी सर्विस कनेक्शन में सीधे टुल्लू पम्प अथवा सक्शन पम्प के प्रयोग पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। निरीक्षण के दौरान ऐसे पम्प पाए जाने पर उन्हें जब्त कर संबंधित जल संयोजन काटने की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा पेयजल का उपयोग सिंचाई, वाहन धुलाई, फर्श धोने या अन्य गैर-आवश्यक कार्यों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। छतों की टंकियों से पानी का ओवरफ्लो या रिसाव पाए जाने पर भी दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आदेश में मुख्य एवं वितरण पाइप लाइनों में लीकेज की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं लीकेज पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि व्यापक जनहित में किए जा रहे राजकीय निर्माण कार्यों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है, लेकिन कार्यदायी संस्थाओं को निर्माण स्थलों पर जल के अनावश्यक दुरुपयोग को रोकना होगा। जल अपव्यय पाए जाने पर संबंधित संस्था को जिम्मेदार माना जाएगा।
जिलाधिकारी ने सभी नागरिकों, संस्थानों और विभागों से आदेशों का कड़ाई से पालन करने की अपील करते हुए कहा कि जल संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है और वर्तमान परिस्थितियों में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है।
