

हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी के न्यूरोसर्जरी विभाग ने स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर के दो जटिल मामलों की सफल सर्जरी कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। खास बात यह रही कि दोनों मरीजों में ऑपरेशन से पहले पैरों की शक्ति लगभग समाप्त हो चुकी थी और वे चलने में असमर्थ थे। सफल सर्जरी के बाद दोनों मरीजों की पैरों की शक्ति में सुधार देखने को मिला है।
इन दोनों मामलों में एक 15 वर्षीय किशोरी और दूसरे 75 वर्षीय बुजुर्ग मरीज शामिल हैं। दोनों मरीज गंभीर न्यूरोलॉजिकल कमजोरी के साथ अस्पताल पहुंचे थे। जांच में उनकी स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर पाया गया, जिसके कारण पैरों की शक्ति प्रभावित हो रही थी।
न्यूरोसर्जन डॉ. अखिलेश जोशी के नेतृत्व में दोनों मरीजों की जटिल स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर सर्जरी की गई। प्रत्येक ऑपरेशन में करीब 4 से 6 घंटे का समय लगा। सर्जरी के बाद दोनों मरीजों में पैरों की शक्ति में सुधार हुआ और उनकी न्यूरोलॉजिकल स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। मरीज अब पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं और चलने-फिरने की दिशा में सुधार कर रहे हैं।
डॉ. अखिलेश जोशी ने बताया कि स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर की सर्जरी बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण होती है। ट्यूमर के आसपास महत्वपूर्ण नसें और स्पाइनल कॉर्ड मौजूद रहते हैं, ऐसे में सर्जरी के दौरान ट्यूमर को सुरक्षित रूप से निकालने के साथ-साथ स्पाइनल कॉर्ड और नसों को संरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है।
सुशीला तिवारी अस्पताल में इस तरह की जटिल न्यूरोसर्जरी का सफलतापूर्वक किया जाना कुमाऊं क्षेत्र के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे गंभीर न्यूरोसर्जिकल समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों और दूर स्थित चिकित्सा केंद्रों का रुख करने की आवश्यकता कम हो सकती है तथा क्षेत्र में ही उन्नत न्यूरोसर्जिकल उपचार उपलब्ध होने का रास्ता मजबूत होता है।
दो मरीज, दो अलग उम्र, लेकिन उम्मीद एक—चलने की।
जहां ऑपरेशन से पहले पैरों की शक्ति लगभग शून्य थी, वहीं सफल सर्जरी के बाद सुधार की शुरुआत ने मरीजों और उनके परिजनों के चेहरे पर नई उम्मीद जगा दी है।
