
हल्द्वानी। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य योगेश रजवार के नेतृत्व में बुधवार को नैनीताल जिले के विभिन्न स्थानों पर बाल संस्थाओं का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य संस्थानों में बच्चों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं, सुरक्षा मानकों और उनके अधिकारों की स्थिति का जायजा लेना था। इसी दौरान हल्द्वानी के गफूर बस्ती रेलवे स्टेशन के पास एक गैर सरकारी संस्था के कथित रूप से बिना पंजीकरण संचालन का मामला सामने आया, जहां 11 बच्चे मौजूद मिले।
संयुक्त निरीक्षण टीम में चाइल्ड हेल्प नैनीताल, बाल कल्याण समिति नैनीताल, विधिक सेवा प्राधिकरण, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल, बनभूलपुरा थाना पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन नैनीताल के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। टीम के निरीक्षण के दौरान गफूर बस्ती रेलवे स्टेशन के पास सुचेतना द्वारा संचालित बताए जा रहे संस्थान में 5 बालिकाएं और 6 बालक मौजूद मिले।
मौके पर मौजूद कर्मचारी मीना सिंह ने बताया कि संस्था का संचालन फादर पाईस द्वारा किया जा रहा है और संस्था को चलाने के लिए मिशनरी की ओर से आर्थिक सहायता दी जाती है। निरीक्षण के दौरान संस्था से संबंधित कोई वैध दस्तावेज या निर्धारित मानकों से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके। जांच में यह भी सामने आया कि संस्था का किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के तहत पंजीकरण नहीं कराया गया था।
निरीक्षण टीम के अनुसार, संस्था में बच्चों के बैठने और रहने का स्थान भी असुरक्षित पाया गया, जो बाल सुरक्षा के निर्धारित मानकों के विपरीत है। इसके अलावा जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि यहां आने वाले कुछ बच्चे पहले से विद्यालयों में पंजीकृत थे।
मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग के सदस्य योगेश रजवार ने बाल कल्याण समिति और चाइल्ड हेल्पलाइन को पूरे प्रकरण की जांच कर दो दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल को संबंधित संस्था और संस्था प्रभारी की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
योगेश रजवार ने कहा कि बिना पंजीकरण इस तरह की संस्थाओं का संचालन बेहद गंभीर मामला है और इससे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि संस्था को मिशनरी से मिलने वाली आर्थिक सहायता और बच्चों को कथित रूप से गुपचुप तरीके से शिक्षा दिए जाने समेत अन्य पहलुओं की भी जांच आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल सुरक्षा के मानकों की अनदेखी करने वाले किसी भी गैर-कानूनी संस्थान के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नैनीताल जिले में बच्चों से संबंधित गैर सरकारी संस्थाओं का औचक निरीक्षण भविष्य में भी लगातार जारी रहेगा।
