
नैनीताल। धोखाधड़ी, धमकी और बदनाम करने की साजिश का शिकार बनीं नैनीताल की प्रसिद्ध कवित्री गौरी मिश्रा को आखिरकार सात साल लंबे कानूनी संघर्ष के बाद न्याय मिल गया। मजबूत साक्ष्यों, सधी हुई विवेचना और वरिष्ठ अधिवक्ता सोनू कुमार की प्रभावी पैरवी के चलते अदालत ने मामले में पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया। गौरी मिश्रा ने बताया कि करीब आठ साल पूर्व हल्द्वानी निवासी गौरव गुप्ता और सौरभ गुप्ता ने उन्हें मकान दिलाने का झांसा देकर 35 लाख रुपये की ठगी की। जब उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई वापस मांगी तो आरोपियों ने न सिर्फ जान से मारने की धमकी दी, बल्कि अपने साथियों डिंपल पाण्डेय उर्फ शत्रुघ्न पांडेय, लीलाधर कांडपाल उर्फ लीला कांडपाल, मुकेश भट्ट और ललित पाण्डेय के साथ मिलकर उनकी तस्वीरें एडिट कर सोशल मीडिया पर वायरल करने की साजिश रची।

पीड़िता के अनुसार आरोपियों ने खुलेआम धमकाते हुए कहा था कि “पैसों को भूल जाओ, हम तुम्हें इतना बदनाम कर देंगे कि मुँह दिखाने लायक नहीं रहोगी और हल्द्वानी शहर छोड़कर भागना पड़ेगा।” इस मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक अपमान की कोशिश ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय न्याय की लड़ाई लड़ने का फैसला किया। मामले की जांच के दौरान नैनीताल पुलिस में तत्कालीन निरीक्षक और जांच अधिकारी रहे अब्दुल कलाम ने गहन विवेचना करते हुए साक्ष्यों को मजबूती से संकलित किया, जो आज इस फैसले की नींव बने। अदालत में विद्वान अधिवक्ता सोनू कुमार ने तथ्यों और सबूतों के आधार पर प्रभावशाली पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप सच सामने आया। फैसले के बाद गौरी मिश्रा ने कहा कि उन्हें शुरू से ही ईश्वर और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था कि देर से ही सही, उन्हें न्याय जरूर मिलेगा।


