
हल्द्वानी। तराई पूर्वी वन प्रभाग के अंतर्गत गोला रेंज स्थित गोरापड़ाव फायर स्टेशन में वनाग्नि नियंत्रण एवं आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए व्यापक मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन प्रभागीय वनाधिकारी श्री हिमांशु बागरी के निर्देशन में संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य आग लगने की स्थिति में विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया, समन्वय और संसाधनों की कार्यक्षमता का परीक्षण करना रहा।

मॉक ड्रिल के दौरान वन विभाग, फायर ब्रिगेड, स्थानीय पुलिस (वायरलेस यूनिट सहित), चिकित्सा विभाग तथा आपदा प्रबंधन टीम के लगभग 60 कार्मिकों ने संयुक्त रूप से भाग लिया। अभ्यास में फायर टेंडर, ब्लोअर मशीन, फायर बीटर, ड्रोन, वायरलेस सेट, प्राथमिक उपचार किट, एम्बुलेंस तथा अन्य जरूरी उपकरणों का उपयोग किया गया।
ड्रिल के तहत 11:25 बजे गोरापड़ाव फायर स्टेशन में वनाग्नि की सूचना प्राप्त होने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। सूचना मिलते ही टीम को तत्काल सक्रिय करते हुए निर्धारित रणनीति के अनुसार मौके पर भेजा गया। टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर आग के फैलाव की दिशा और जोखिम वाले क्षेत्रों का आकलन किया तथा कंट्रोल लाइन बनाकर, ज्वलनशील सामग्री हटाकर और आधुनिक उपकरणों की सहायता से आग पर नियंत्रण पाने का अभ्यास किया। लगभग 12:00 बजे आग को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।

मॉक ड्रिल के दौरान एक व्यक्ति के धुएं से प्रभावित होने की काल्पनिक स्थिति भी बनाई गई, जिसमें घायल को सुरक्षित निकालकर प्राथमिक उपचार दिया गया और एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के अभ्यास से वनाग्नि सीजन से पहले विभागीय तैयारियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है तथा आपदा के समय विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है। कार्यक्रम के अंत में सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से समीक्षा बैठक कर आवश्यक सुझाव साझा किए और भविष्य में वन सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया।



